बंकिम दृष्टि/जितेंद्र शर्मा
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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत होने वाली शादियों में सरकार या यों कहें नौकरशाहों ने कई अलिखित नियम बना डाले हैं। इनमें से कुछ तो कानून के विपरीत भी हैं। पता चला है कि अभी राजधानी रायपुर में होने वाली 500 से अधिक गरीब कन्याओं के विवाह के लिए बहुत आवेदन आये हैं। इनमें से दो आवेदन ऐसे हैं, जिनपर नजरें ठहर जाती हैं। एक में तो अर्जी लगाने वालों के धर्म अलग हैं। एक हिन्दू है तो दूसरा मुस्लिम। संविधान में कहीं शायद ऐसा नहीं लिखा गया है कि इनकी शादी नहीं हो सकती। पर यहां सरकार ने इस आवेदन को खारिज दिया। दूसरी अर्जी लिव इन रिलेशनशिप में सालों से रह रहे जोड़े की है। महोदयों ने इसे भी मंजूर नहीं किया। बात खुली तो चुगाली करने लगे कि यदि हमने परमिट कर दिया तो बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। इसलिए बेहतर है कि कन्नी काट लो। भले ही कानून और मानवाधिकार के खिलाफ ही निर्णय क्यों न हो। बहरहाल सरकार के विरोधी इसमें भी चुटकी लेने से नहीं कतरा रहे हैं। कह रहे हैं, ऐसे ही गढ़बो नवा छत्तीसगढ़।