कार्यवाहक गिरिजा बनी पालिका की स्थाई अध्यक्ष
खैरागढ़. सत्ता बदलने के बाद नगरपालिका परिषद की सत्ता भी आने वाले दो वर्षो के लिए स्थाई रूप से बदल चुकी है। कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिजा नंद चंद्राकर ने कांग्रेस के 3 बागी और 1 भीतरघाती वोट के सहारे कांग्रेस की सुमन दयाराम पटेल को 14 - 6 से पराजित किया। इससे पहले नगरपालिका में कांग्रेस व भाजपा पार्षद की संख्या 10 - 10 थी। लेकिन हफ्ते भर पहले ही पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शैलेन्द्र वर्मा सहित राजफैमिली वार्ड क्रमांक 04 के पार्षद सुमित टांडिया और वार्ड क्रमांक 03 के पार्षद दिलीप राजपूत भूमिगत हो गए। सूचना मिली कि ये तीनों भाजपा के जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ चुनाव से पहले ही हार जीत की स्थिति साफ हो चुकी थी। लेकिन बुधवार सुबह चुनाव प्रभारी नीलू शर्मा और प्रदेश महामंत्री रामजी भारती की मौजूदगी में तीनों पार्षद ने भाजपा का दामन थाम लिया।जिसके बाद महज़ चुनाव की औपचारिकता हुई। भाजपा जिला अध्यक्ष घम्मन साहू ने घोषित कर दिया था कि भाजपा 14 - 6 से पालिका में काबिज़ होने जा रही है। जिसका अंदाज़ा कांग्रेस नेताओं को भी था। परिणाम के बाद एक भीतरघाती वोट और भाजपा की झोली में गिरा।
तस्वीरों पर पोती कालिख
चुनाव के दौरान नगरपालिका के सामने खूब नारेबाज़ी हुई। पूर्व अध्यक्ष सहित अन्य 2 बागी पार्षद की तस्वीरों को लहराते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गद्दार का तमगा दिया। तस्वीरों पर कालिख पोतकर चप्पल मारा। इधर,भाजपा की ओर से भी जमकर नारेबाज़ी हुई। उधर,कांग्रेसी पार्षद के भाजपा में शामिल होने के बाद तीनों को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया। महामंत्री पंडित मिहिर झा ने इसका पत्र जारी किया।
एकजुट रहे भाजपा के वोट
चुनाव से पहले भाजपा में गुटबाज़ी और खेमेबाज़ी का अंदेशा जताया जा रहा था। लेकिन अंदेशा गलत साबित हुआ। संगठन में न ही किसी तरह की फूट हुई और न ही कोई गतिविधि हुई। भाजपा के सारे वोट एकजुट रहे।
कभी शैलेन्द्र को अध्यक्ष बनाने नवाज़ ने की थी मेहनत
कांग्रेस की सत्ता के दौरान पिपरिया वार्ड क्रमांक 02 से पहली बार पार्षद बने शैलेन्द्र को अध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस नेता नवाज़ खान ने खासी मेहनत की। कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद को दरकिनार कर शैलेन्द्र को अध्यक्ष बनाया गया था।
भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज हुआ था एफआईआर
बीते नगरपालिका चुनाव में पाला बदलने वाले सुमीत टांडिया के वार्ड. क्रमांक 04 के परिणामों के चलते ही प्रशासन और भाजपा नेताओं के बीच टकराव की स्थिति निर्मित हुई थी। और कांग्रेस सत्ता के दौरान भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुआ था।